रम्या, एक कामकाजी माँ, रात के समय घर में शांति पसंद करती थी। लेकिन काम से लौटने के बाद, जब बच्चे घर आते, तो टीवी की आवाज़, मोबाइल अलार्म, रसोई से आती महक—ये सब मिलकर घर में हल्का सा शोर पैदा करते। जब बच्चों के सोने का समय आया, रम्या ने अपना मोबाइल एक तरफ रख दिया और सोचा कि बच्चों को कहानियाँ सुनाए। लेकिन अचानक देखा, दोनों बच्चे अपने टैबलेट पर वीडियो देख रहे थे।
रम्या को अपनी दादी के समय की याद आई। तब रात होते ही घर के सभी लोग बाहर की बत्तियाँ बुझा देते, धीरे-धीरे कहानियाँ सुनाते और शांति से सो जाते। न कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, न कोई बाहरी शोर। वही शांति, वही गहरी नींद, अगले दिन को ताजगी से शुरू करने में मदद करती थी।
अब रम्या ने बच्चों से धीरे से कहा: “जब हमारे आस-पास शांति होगी, तभी हम भी शांति से सो सकते हैं। कल सुबह हम ताजगी के साथ उठेंगे।” बच्चों ने थोड़ी हिचकिचाहट के बाद मोबाइल छोड़ दिए और माँ के पास आकर लेट गए। उस रात, घर में एक छोटी सी शांति जन्मी।
अगली सुबह, जब रम्या उठी, उसने अपने भीतर एक बदलाव महसूस किया। बच्चे भी कुछ ज्यादा उत्साह के साथ उठे। वह शांत रात, परिवार के अगले दिन को बदल गई। पुराने समय की शांति, आज एक नई आदत बनने का क्षण थी।
रम्या ने महसूस किया कि एक छोटी सी बदलाव, परिवार की दीर्घकालिक सेहत के लिए बीज बो सकती है।