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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 25 / 27

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जो आत्मा सम्मान और अपमान में समान रहती है; जो मित्रों और शत्रुओं में समान रहती है; और जो सभी प्रयासों में भाग लेने से दूर रहती है; ऐसी आत्माएँ प्रकृति के गुणों से परे होती हैं।
⚖️ सम्मान, अपमान — तुम्हारा मन कहाँ खड़ा है?
कृष्ण समता के महत्व को समझाते हैं। सम्मान, अपमान तुम्हारे मन को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
  • 🌀 मन की समता — सम्मान अपमान तुम्हारे मन को नहीं हिला सकता।
💭 सम्मान या अपमान तुम्हारे मन को कैसे प्रभावित करता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।