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श्लोक : 24 / 27

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जो आत्मा सुख और दुख में समान रहती है; जो पत्थर, मिट्टी और सोने में समान रहती है; जो प्रिय और अप्रिय घटनाओं में समान रहती है; जो प्रशंसा और निंदा में समान रहती है; ऐसी आत्माएँ प्रकृति के गुणों से परे मानी जाती हैं।
⚖️ सुख, दुख, यश, अपयश — तुम्हारी मानसिक स्थिति कहाँ है?
कुरुक्षेत्र में कृष्ण समता का अर्थ समझाते हैं। आज के जीवन में, मानसिक तनावों का संतुलित सामना करना आवश्यक है।
  • ⚖️ मानसिक शांति — सुख और दुख मन को विचलित करते हैं।
💭 आप संतुलन कैसे प्राप्त करेंगे?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।