आपने देखा होगा कि एक ही ग्रह गोचर (Transit) की तिथि अलग-अलग मीडिया और वेबसाइटों पर भिन्न दिखाई देती है। यह कोई गलती नहीं है — यह भारतीय ज्योतिष में उपयोग की जाने वाली दो अलग-अलग पंचांग पद्धतियों के कारण होने वाला स्वाभाविक अंतर है।
🔭 दो पंचांग पद्धतियाँ
- वाक्य पंचांग — सदियों पुरानी पद्धति जो पूर्व-गणित अनुमानों पर आधारित है। आज भी कुछ क्षेत्रों और मीडिया में उपयोग की जाती है।
- तिरुक्कणित (दृक्) पंचांग — आधुनिक खगोल विज्ञान पर आधारित पद्धति जो सटीक गणितीय गणनाओं का उपयोग करती है। NASA स्तर के एफेमेरिस डेटा से संरेखित।
⚖️ दोनों में क्या अंतर है?
वाक्य और तिरुक्कणित पंचांग अपनी गणना पद्धति में भिन्न हैं।
इसके कारण गोचर का समय या तिथि कभी-कभी भिन्न हो सकती है। यह अंतर कुछ मामलों में छोटा हो सकता है; कुछ परिस्थितियों में यह अधिक भी दिख सकता है।
यह अंतर "कौन सही / कौन गलत" का मामला नहीं है — यह केवल उपयोग की गई गणना पद्धति और परिभाषा (definition) का अंतर है।
Jathagam.ai लगातार तिरुक्कणित (दृक्) पंचांग मानक का उपयोग करता है, और हमारे सभी गणनाएँ (गोचर, मुहूर्तम, दशा आदि) उसी मानक पर चलती हैं।
🌐 Jathagam.ai किस मानक का पालन करता है?
Jathagam.ai विशेष रूप से तिरुक्कणित (दृक्) पंचांग का ही उपयोग करता है।
🪐 यह किन-किन गोचरों पर लागू होता है?
यह नीति सभी प्रमुख ग्रह गोचरों पर लागू होती है:
- शनि गोचर — लगभग 2.5 वर्ष का चक्र
- गुरु (बृहस्पति) गोचर — लगभग 1 वर्ष का चक्र
- राहु-केतु गोचर — लगभग 1.5 वर्ष का चक्र
अधिक जानकारी के लिए हमारा ग्रह गोचर पृष्ठ देखें, या ज्योतिष तथ्य पढ़ें।
📌 सारांश
- मीडिया में अलग-अलग तिथियाँ = वाक्य बनाम तिरुक्कणित गणना पद्धति का अंतर।
- Jathagam.ai केवल तिरुक्कणित (दृक्) मानक का पालन करता है।
- दोनों पद्धतियों का सांस्कृतिक महत्व है; अंतर केवल गणना परिभाषा का है।
- यह केवल शनि पर ही नहीं, बल्कि गुरु, राहु और केतु गोचर पर भी लागू होता है।