No Ads
Language
ज्कुंडली.ai

श्लोक : 3 / 29

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जो न नफरत करता है और न चाहता है, वह हमेशा योगी माना जाता है; वह ईर्ष्या से मुक्त होता है; वह निश्चित रूप से सुख के बंधनों से मुक्त होता है।
🧘 कृष्ण कहते हैं संतुलन, तुम्हारी मानसिक शांति कहाँ?
कृष्ण के ये शब्द संतुलन की आवश्यकता को दर्शाते हैं। घृणा और इच्छाएँ तुम्हारे मन को नियंत्रित करती हैं।
  • ⚖️ संतुलन की खोज — घृणा तुम्हारी मानसिक शांति को बिगाड़ती है।
💭 तुम अपने मन में घृणा और इच्छाओं को कैसे संभालते हो?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।