जो व्यक्ति भीतर आनंदित, स्थिर मन और अत्यधिक प्रकाश के साथ होता है, वास्तव में वह योगी है; वह अपने बुद्धि और पूर्ण ब्रह्म में डूब जाएगा।
भगवान श्री कृष्ण
🧘 आंतरिक आनंद, तुम्हारी मन की शांति का स्रोत
कृष्ण आनंद की गहराई को समझाते हैं। आंतरिक शांति सच्चे योग का निर्माण करती है।
- आंतरिक आनंद — आंतरिक आनंद स्थायी खुशी देता है।
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।