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श्लोक : 24 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
लेकिन, छोटे सुखों की इच्छाओं से किए गए कार्य; गर्व के लिए बार-बार किए गए कार्य; और, अत्यधिक मानसिक तनाव के साथ किए गए कार्य; ऐसे कार्यों को, तृष्णा [राजस] गुण के साथ किया गया कहा जाता है।
🔥 गौरव और तनाव के बीच तुम्हारे कार्य
कृष्ण द्वारा बताए गए कार्यों का केंद्र लालसा है। आज की दुनिया में, कई लोग कार्यों को गौरव के लिए या तनाव के साथ करते हैं।
  • 💼 गौरव का मोह — गौरव तुम्हारे कार्यों को प्रभावित करता है।
💭 तुम्हारे कार्यों में लालसा कैसे प्रकट होती है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।