जीवों की दुनिया और जीवन का निर्माण निश्चित रूप से मेरे नित्य जीवन का एक हिस्सा है; प्रकृति की स्थिति में होने के कारण, वे मन सहित छह इंद्रियों द्वारा खींचे जाते हैं।
भगवान श्री कृष्ण
🌿 तुम्हारा मन, इंद्रियों का दास — तुम्हारी गहराई कहाँ?
भगवान कृष्ण जीवन की प्रकृति को समझाते हैं। मन और इंद्रियों का दास बनकर हम खिंच जाते हैं। इससे हमारा जीवन दुख और सुख का शिकार बनता है।
- मन और इंद्रियाँ — इंद्रियाँ मन को आसानी से आकर्षित कर लेती हैं।
💭 तुम्हारा मन इंद्रियों का दास बनकर कब खिंचता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।