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श्लोक : 22 / 27

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
पांडव, प्रसिद्धि, कर्म और माया होने पर, वे आत्माएँ इन्हें नफरत नहीं करेंगी; और जब ये छिप जाएँगी, तो वे आत्माएँ इन्हें पसंद भी नहीं करेंगी।
⚖️ यश, कर्म, माया — तुम्हारी मन की शांति कहाँ?
कृष्ण यश और माया के प्रभावों को समझाते हैं। मन को भ्रमित किए बिना संतुलन में रहना चाहिए।
  • 🌟 यश की माया — मन समझता है कि यश अस्थायी है।
💭 आप कब यश या कर्म से मन की शांति खो देते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।