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श्लोक : 30 / 55

अर्जुन
अर्जुन
विष्णु प्राण, उन लोगों को तुम चारों ओर से, उनके सम्पूर्ण शरीर को चाट रहे हो; अपनी अग्नि से भरी हुई मुँह से, उन मनुष्यों को निगल रहे हो; अपनी कठोर गर्मी की रोशनी के चमकदार किरणों से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को भर रहे हो।
🔥 अर्जुन का आघात, तुम्हारे भय की छाया कहाँ?
अर्जुन कृष्ण का विश्वरूप देखता है। यह उसे बहुत बड़ा आघात देता है। जब तुम अपने जीवन की समस्याओं का सामना करते हो, तो तुम्हें कैसा लगता है?
  • 😨 आघात की भावना — आघात तुम्हारे मन को उलझन में डालता है।
💭 तुम्हारे जीवन में कौन से अनुभव तुम्हें आघात पहुँचाते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।