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श्लोक : 20 / 55

अर्जुन
अर्जुन
परमात्मा, आकाश और पृथ्वी के बीच, आप ही वास्तव में सभी दिशाओं में फैले हुए हैं; आपके इस अद्भुत और भयानक रूप को देखकर, तीनों लोक भयभीत होकर कांप रहे हैं।
🌌 अर्जुन की दृष्टि में, तुम्हारे भीतर की गहराई कहाँ है?
अर्जुन कृष्ण के विश्वरूप को देखता है। जब तुम अपने जीवन की बड़ी चुनौतियों का सामना करते हो, तो क्या महसूस करते हो?
  • 😨 भय की छाया — बड़ी शक्ति तुम्हें भयभीत करती है।
💭 तुम्हारे जीवन में कौन सी परिस्थितियाँ तुम्हें भयभीत करती हैं?
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ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।