तू आरंभ, केंद्र और अंत के बिना है; तेरी शक्ति असीमित है; तू असीमित अस्त्रों के साथ है; तेरी आँखें सूर्य और चंद्रमा की तरह हैं; तेरा मुँह, आग को उगलते हुए मैं देख सकता हूँ; और, तेरी दिव्य प्रबंधन से यह ब्रह्मांड चमकता है।
अर्जुन
🔥 अर्जुन की दृष्टि में, तुम्हारे भीतर की गहराई कहाँ है?
अर्जुन कृष्ण के विश्वरूप को देखता है। असीम शक्ति तुम्हारे भीतर भी है।
- सूर्य चंद्रमा — मन प्रकाश की खोज करता है।
💭 तुमने अपने भीतर की असीम शक्ति कब महसूस की?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।