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श्लोक : 17 / 55

अर्जुन
अर्जुन
तेरे दिव्य रूप की विशेषता अनेक रंगों में है, सिर पर मुकुट धारण किए हुए, हाथ में अस्त्र लिए हुए और वृत्तों के साथ; यह हर जगह चमकता है; तुझमें, हर जगह चमकने वाले सूर्य की असीमित जलती हुई अग्नि को देखना कठिन है।
🌟 अर्जुन का दर्शन, तुम्हारे भीतर की गहराई कहाँ है?
अर्जुन कृष्ण के विश्वरूप को देखता है। इसमें कई रंग, मुकुट, और हथियार हैं। आज की जिंदगी की जटिलताओं को इससे समझो।
  • 🔥 भीतर का डर — डर तुम्हारे मन को छुपाता है।
💭 तुम अपनी जिंदगी के कई आयामों को कैसे महसूस करते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।