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श्लोक : 19 / 34

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
अर्जुन, मैं ही सूर्य हूँ; मैं ही वर्षा हूँ; मैं ही उन्हें नियंत्रित करके उन्हें छोड़ता हूँ; मैं ही अमरता और मृत्यु हूँ; मैं ही अस्तित्व और अनुपस्थिति हूँ।
☀️ कृष्ण कहते हैं, तुम्हारे जीवन के सभी पहलू
कृष्ण स्वयं को धूप और बारिश के रूप में वर्णित करते हैं। हमारे जीवन के सभी पहलू उनके द्वारा संचालित होते हैं।
  • 🌦️ प्रकृति का शासन — धूप और बारिश हमारे जीवन के हिस्से हैं।
💭 तुम्हारे जीवन के किस पहलू में तुम कृष्ण का शासन महसूस करते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।