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श्लोक : 18 / 34

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
मैं ही लक्ष्य; मैं ही सहारा; मैं ही स्वामी; मैं ही साक्षी; मैं ही ठिकाना; मैं ही छिपने का स्थान; मैं ही मित्र; मैं ही रूप; मैं ही निर्णय; मैं ही स्थान; मैं विश्राम का स्थान; मैं ही अमर बीज।
🌌 कृष्ण कहते हैं, तुम्हारे जीवन का आधार कौन है?
कृष्ण खुद को सबका आधार बताते हैं। हमारे जीवन के सभी आयामों में उनकी भूमिका है।
  • 🌿 आंतरिक आधार — आंतरिक आधार तुम्हारी मानसिक शांति को सुनिश्चित करेगा।
💭 क्या तुम अपने जीवन में कृष्ण की भूमिका देख रहे हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।