लेकिन, नैतिकता वाले लोग अपने पापों को समाप्त करके माया के द्वंद्वों [इच्छा और घृणा] से मुक्त हो जाते हैं; वे दृढ़ संकल्प के साथ मेरी पूजा करते हैं।
भगवान श्री कृष्ण
🌿 माया के द्वैतों से मुक्त होता तुम्हारा मन
कुरुक्षेत्र की स्थिति में कृष्ण बोलते हैं। इच्छा, घृणा से मुक्त होने की आवश्यकता को समझें।
- मन की दृढ़ता — मन की दृढ़ता तुम्हारी यात्रा का मार्गदर्शन करेगी।
💭 तुम्हारे जीवन में इच्छा और घृणा कैसे प्रकट होती हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।