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श्लोक : 9 / 29

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
और, वह उन कार्यों को केवल छोटे सुख के अनुभव के इंद्रियों के कार्यों के रूप में देखता है।
🌀 कृष्ण द्वारा बताए गए कर्मों का सत्य, तुम्हारी मन की शांति कहाँ?
कृष्ण द्वारा बताए गए इस अनुभव में अहंकार छिपा है। कर्मों को कर्तव्य मानने पर मन की शांति मिलती है।
  • 🔍 कर्मों का सत्य — कर्मों को कर्तव्य मानने पर मन की शांति।
💭 आप कौन से कर्मों को कर्तव्य मानकर नहीं देख पाते?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।