No Ads
Language
ज्कुंडली.ai

श्लोक : 28 / 43

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
शक्तिशाली अस्त्र धारण करने वाले, कर्म के गुणों की असली प्रकृति को समझने वाला मनुष्य, जब कर्म में संलग्न होता है, तब इंद्रियों के साथ जुड़ा नहीं रहता; वह मनुष्य कर्मों और उनके परिणामों के गुणों के बीच के भेद को निश्चित रूप से समझता है।
🔍 इंद्रियों के जाल में नहीं, कर्म की सच्चाई को जानें
कुरुक्षेत्र में, कृष्ण कर्म की सच्चाई बताते हैं। इंद्रियों के जाल में फंसे बिना, कर्म की सच्चाई को जानें।
  • 🧠 मन की शांति — इंद्रियों के जाल में न फंसना शांति देता है।
💭 क्या आप अपने कर्मों की सच्ची प्रकृति को समझते हैं?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।