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श्लोक : 15 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
एक व्यक्ति के लिए सामान्यतः दुःख और सुख, एक बार भी न बदलने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से मनुष्यों में श्रेष्ठ है; दुःख और सुख दोनों में धैर्य रखने वाला व्यक्ति, अमरता के योग्य माना जाता है।
🌀 कृष्ण के शब्द: तुम्हारी मन की शांति कहाँ है?
कृष्ण यहाँ मन की शांति के महत्व को बताते हैं। सुख-दुख आने पर भी मन स्थिर रहना आवश्यक है।
  • 🌊 सुख-दुख की लहरें — लहरों की तरह सुख-दुख बदलते हैं।
💭 सुख या दुख आने पर तुम्हारा मन कैसे प्रतिक्रिया करता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।