छोटी सुखों के इंद्रियों के संबंध से बाहर आने वाला आनंद; शुरुआत में अमृत की तरह और अंत में विष की तरह होता है; ऐसा आनंद महा आसक्ति [राजस] गुण के साथ होने के रूप में कहा जाता है।
भगवान श्री कृष्ण
🌿 कृष्ण द्वारा बताए गए तीन सुख — तुम्हारी मन की शांति कहाँ है?
सुख की शुरुआत मीठी होती है। लेकिन, अंत में यह दुख दे सकता है। आज की जिंदगी में यह कई लोगों का अनुभव है।
- अधिक लालसा — अधिक लालसा मन की शांति को भंग करती है।
💭 तुम्हारी जिंदगी में कौन से सुख विष में बदल रहे हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।