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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 35 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
पार्थ के पुत्र, मूर्खता में डूबा हुआ मनुष्य का संकल्प स्वप्न, भय, चिंता, दुःख और पागलपन को छोड़ने नहीं देता; ऐसा संकल्प अज्ञानता [तमस] गुण का है।
🌀 सपने, डर, दुःख — तुम्हारा मन कहाँ खो रहा है?
पार्थ के पुत्र, यहाँ कृष्ण तमस के गुण को समझा रहे हैं। जब हमारा मन सपनों, डर, दुःख से प्रभावित होता है, यह अज्ञानता का संकेत है।
  • 🌫️ मन की उलझन — सपने मन की शांति को भंग करते हैं।
💭 तुम्हारे मन में कौन से सपने तुम्हें नियंत्रित कर रहे हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।