उन शंखों की ध्वनि की तरंगों ने, धृतराष्ट्र के पुत्रों के दिल में बड़ी हलचल पैदा की; इसके अलावा, यह आकाश और पृथ्वी की सतह पर भी बड़ी कंपकंपी उत्पन्न की।
संजय
🔔 कुरुक्षेत्र में शंख की ध्वनि, तुम्हारा मन कहाँ है?
संजय द्वारा कही गई इस ध्वनि की कंपन डर पैदा करती है। आज की जिंदगी में, अप्रत्याशित चुनौतियाँ मन को झटका देती हैं।
- कंपन अनुभव — तेज ध्वनि आंतरिक शांति को भंग करती है।
💭 तुम्हारे मन की शांति को भंग करने वाली ध्वनियाँ कौन सी हैं?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।