अर्जुन, परंतप, मेरी जन्मों की संख्या कई जन्मों को पार कर चुकी है; तुम्हारी भी; मैं उन सभी को जानता हूँ; लेकिन, यह तुम्हें ज्ञात नहीं है।
भगवान श्री कृष्ण
🔍 कृष्ण का ज्ञान, तुम्हारी सच्चाई कहाँ छिपी है?
कृष्ण अपने कई जन्मों को जानने की बात कहते हैं। लेकिन, हममें से कई अपनी सच्चाई को भूलकर जीते हैं।
- छिपी सच्चाई — सच्चाई को छिपाने में डर काम करता है।
💭 क्या तुम अपनी सच्ची पहचान जानते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।