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श्लोक : 31 / 43

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जो मेरी इस ज्ञान को बिना किसी लोभ के पूरी सहमति के साथ अपनाते हैं, वे सभी मनुष्य कर्मों के फल से मुक्त हो जाते हैं।
🧘 कृष्ण कहते हैं, तुम्हारे कर्म तुम्हें मुक्त करेंगे
कृष्ण यहाँ निर्लिप्त कर्म के महत्व को बताते हैं। इसी तरह, जीवन में निर्लिप्त होकर कर्म करना तुम्हें शांति और संतोष देगा।
  • 🔍 आत्म निरीक्षण — गहन आत्म निरीक्षण मन को शांति देता है।
💭 आप किन कार्यों में निर्लिप्त होकर कार्य करते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।