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श्लोक : 22 / 43

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
हे पार्थ के पुत्र, तीनों लोकों में मुझ पर कोई कर्तव्य नहीं है; मुझे कुछ भी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है, मैं कुछ भी नहीं प्राप्त करूंगा; लेकिन, मैं वास्तव में अभी भी क्रियाशील हूं।
🌍 कृष्ण कहते हैं, कर्तव्य का सच्चा अर्थ
कृष्ण के इस वचन में कर्तव्य की गहराई प्रकट होती है। बिना किसी अपेक्षा के कार्य करना हमारे मन को शांत करता है।
  • 🎯 बिना अपेक्षा — बिना अपेक्षा के कार्य मन की शांति देता है।
💭 तेरे कार्यों में कितनी अपेक्षा है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।