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श्लोक : 13 / 43

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
स्थिर योगी, भगवान को प्रणाम करने के बाद भोजन के बचे हुए अंशों का सेवन करके, सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है; लेकिन, अपने स्वार्थ के लिए भोजन करने वाला बड़ा पाप करता है।
🍽️ भोजन की पवित्रता, तुम्हारी मन की शांति बनाएगी
कृष्ण भोजन की पवित्रता समझाते हैं। तुम्हारे कर्म पवित्र होने चाहिए।
  • 🙏 पवित्र भोजन — पवित्र भोजन मन की शांति बनाएगा।
💭 भोजन को उत्कृष्ट बनाने के लिए तुम्हारा मन तैयार है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।