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श्लोक : 66 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
यदि किसी व्यक्ति का मन नियंत्रित नहीं है, तो निश्चित रूप से उस व्यक्ति के पास स्थायी बुद्धि नहीं हो सकती; ऐसे व्यक्ति के पास शांति नहीं है; क्या अशांत मन के लिए आनंद संभव है?
🧘 मन की शांति के बिना, जीवन में आनंद कहाँ?
कृष्ण मन के नियंत्रण की आवश्यकता को समझाते हैं। यदि मन शांत नहीं है, तो जीवन में शांति नहीं मिलती।
  • 🌊 मन की अशांति — अशांत मन शांति को नष्ट करता है।
💭 तुम्हारा मन कब अशांत होता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।