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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 57 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जो न तो अच्छाई और न ही बुराई से बंधा है, जो हर जगह है, जो कभी भी इच्छाशक्ति नहीं रखता, और जो कभी भी ईर्ष्या नहीं करता; उस मनुष्य की बुद्धि स्थिर है।
🧘 कृष्ण कहते हैं: मन की शांति, निर्लिप्त अवस्था
कृष्ण अर्जुन से बात कर रहे हैं। मन की शांति निर्लिप्त अवस्था में है। आज की दुनिया में, यह तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण है।
  • ⚖️ निर्लिप्त मन — निर्लिप्त मन शांति देता है।
💭 क्या तुम्हारा मन किसी भी बंधन से मुक्त रह सकता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।