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श्लोक : 47 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
दूसरे की जिम्मेदारी को सही तरीके से करने से बेहतर है कि कोई अपनी खुद की जिम्मेदारी को पूर्णता के साथ निभाए; किसी की अपनी जिम्मेदारी निभाना कभी भी पाप का मार्ग नहीं प्रशस्त करता।
🌀 अपने कर्तव्य में गहरी संतुष्टि का अनुभव करें
कृष्ण आपके अपने कर्तव्य के महत्व को बताते हैं। दूसरों के मार्ग पर न चलें, अपना मार्ग चुनें।
  • 🔍 सच्चा मार्ग — अपने कर्तव्य में संतोष है।
💭 आप अपने कर्तव्यों को कैसे महसूस करते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।