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श्लोक : 21 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
सभी जीवों के सभी विभाजनों के भीतर अलग-अलग विविधताओं को एक व्यक्ति देखता है, यह ज्ञान, जो कि महान आसक्ति [राजस] गुण में है, इसे जान लो।
🔍 कृष्ण का बहुपक्षीय दृष्टिकोण — तुम्हारा मन कहाँ है?
यहाँ मुख्य भावना लालच है। विभिन्न पक्षों को अलग-अलग देखने पर, सच्चा ज्ञान छिप जाता है।
  • 🔄 बहुपक्षीय दृष्टिकोण — बहुपक्षीय दृष्टिकोण मन को भ्रमित करता है।
💭 तुम्हारे जीवन में कौन से बहुपक्षीय दृष्टिकोण तुम्हें भ्रमित करते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।