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श्लोक : 2 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
इच्छित कार्यों को छोड़ना संन्यास है, ऐसा समझने वाला व्यक्ति समझता है; सभी कार्यों के फलों को छोड़ना त्याग है, ऐसा बुद्धिमान व्यक्ति समझता है।
🕊️ कृष्ण के शब्द, तुम्हारे कर्मों के फल को मुक्त करते हैं
कृष्ण यहाँ सन्यास की भावना व्यक्त करते हैं। फल को छोड़ना तुम्हें मानसिक शांति देगा।
  • 🌱 सन्यास की भावना — कर्मों के फल को छोड़ना मानसिक शांति देता है।
💭 तुम्हारे कर्मों के फल को छोड़ने में तुम्हें क्या बाधा है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।