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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 17 / 35

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
और यह सभी जीवों में अविभाज्य है; यह संगठित है; यह स्थिरता से खड़ा है; यह जीवों का भगवान है; इसे स्वीकार करना स्वाभाविक है, यह जान ले; और, यह अत्यधिक प्रभावशाली है।
🌌 अंतर में स्थित आत्मा की शक्ति — तुम्हारे जीवन का प्रकाश
कृष्ण आत्मा की प्रकृति बताते हैं। यह तुम्हारे जीवन का आधार है।
  • 🔍 आत्मा की अनुभूति — अंतर में स्थित आत्मा तुम्हारी भावनाओं का मार्गदर्शन करती है।
💭 तुम अपने जीवन में आत्मा की शक्ति को कैसे महसूस करते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।