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श्लोक : 55 / 55

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
पांडव, जो मेरे लिए कार्य करता है, जो मुझमें भक्ति रखता है, जो मुझे प्रणाम करता है, बंधनों से मुक्त होता है, और सभी जीवों के प्रति शत्रुतापूर्ण नहीं होता; ऐसा मनुष्य मेरे पास आता है।
🕊️ कृष्ण की मार्गदर्शन: शत्रुता रहित मन, शांतिपूर्ण जीवन
कृष्ण के शब्द शांति के मार्गदर्शक। शत्रुता रहित मन तुम्हारी शांति का आधार है।
  • 💖 शत्रुता रहित मन — शत्रुता रहित मन तुम्हारी शांति का आधार है।
💭 तुम्हारे कार्यों में शत्रुता रहित मन कैसे प्रकट होता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।