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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 36 / 55

अर्जुन
अर्जुन
हिरुषिकेश, तुझे सही से प्रशंसा करके यह ब्रह्मांड आनंदित हो रहा है; सभी असुर तुझमें भय के कारण सभी दिशाओं में बिखरकर भाग रहे हैं; और पूर्ण मानवों का समूह भी तुझे प्रणाम कर रहा है।
🌌 अर्जुन कृष्ण की शक्ति को समझकर चकित हैं
अर्जुन कृष्ण की शक्ति को समझकर चकित हैं। असुर डरकर भागते हैं। अच्छे लोग नमन करते हैं।
  • 😲 आश्चर्य का अनुभव — अत्यधिक शक्ति को देखने पर मन चकित होता है।
💭 तुम्हारी ज़िंदगी में क्या तुम्हें चकित करता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।